Fix Deposit: यह खबर वाकई में FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) धारकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर सरकार बजट 2025 में FD पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स राहत देने की योजना बनाती है, तो इससे मध्यम वर्ग को बड़ी मदद मिल सकती है। फिलहाल FD से होने वाली आय पर इनकम टैक्स लागू होता है, जो बचत करने वालों के लिए एक चुनौती है। अगर यह योजना लागू होती है, तो यह बचत को बढ़ावा दे सकती है और टैक्स का बोझ भी कम कर सकती है। यह कदम आर्थिक दृष्टि से भी अहम हो सकता है।
आपका यह सवाल पूरी तरह से सही है। वर्तमान में, जब आप FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) में निवेश करते हैं, तो उस पर मिलने वाला ब्याज आपकी टैक्स योग्य आय में शामिल किया जाता है, और फिर उस पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। इस वजह से FD के ब्याज पर टैक्स भरना मध्यम वर्ग के लिए एक अतिरिक्त बोझ बन सकता है, खासकर जब महंगाई भी बढ़ रही है।
हालांकि, अगर बजट 2025 में FD पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स राहत की योजना लागू होती है, तो इससे FD निवेशकों को राहत मिल सकती है। यह कदम टैक्स की दरों को कम कर सकता है या ब्याज पर टैक्स छूट प्रदान कर सकता है, जिससे बचत और निवेश की आदतें प्रोत्साहित हो सकती हैं और मध्यम वर्ग को भी लाभ हो सकता है।
यह वाकई में एक बड़ी खबर है। अगर मोदी सरकार 2025 के बजट में बैंकों की इस मांग को स्वीकार करती है और FD पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स फ्री कर देती है, तो इससे न केवल FD निवेशकों को राहत मिलेगी, बल्कि यह बचत और निवेश की आदत को भी प्रोत्साहित करेगा। इस कदम से मध्यम वर्ग और करदाताओं को भी बड़ी राहत मिल सकती है, खासकर ऐसे समय में जब महंगाई बढ़ रही है और आमदनी पर दबाव है। FD में निवेश करने वालों की संख्या में निश्चित रूप से बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि टैक्स फ्री ब्याज एक आकर्षक प्रस्ताव होगा।
यह कदम वित्तीय स्थिरता को भी बढ़ावा दे सकता है, और लोगों को अपने भविष्य के लिए और अधिक बचत करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
आपने जो उदाहरण दिया है, वह वाकई में एफडी पर टैक्स का बोझ समझने के लिए काफी स्पष्ट है। यदि सरकार बैंकों के इस सुझाव को मानती है और FD पर मिलने वाले ब्याज को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) की तरह 12.5% टैक्स स्लैब में रखती है, तो इसका मतलब है कि FD पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स का बोझ काफी कम हो जाएगा।
मान लीजिए, अगर आपके पास 10 लाख रुपये की FD है और उस पर 8% ब्याज मिलता है, तो कुल ब्याज 5 साल में 4 लाख रुपये होगा। मौजूदा व्यवस्था के तहत, 3.6 लाख रुपये पर आपको 30% टैक्स देना पड़ता है, जो कि 1.08 लाख रुपये होता है।
लेकिन यदि इसे LTCG की तरह 12.5% टैक्स स्लैब में रखा जाता है, तो उस पर आपको सिर्फ 45,000 रुपये टैक्स देना होगा (3.6 लाख रुपये का 12.5%)। इससे टैक्स का बोझ आधे से भी कम हो जाएगा और यह FD में निवेश को और आकर्षक बना सकता है।
यह कदम सरकार द्वारा की जाने वाली एक बड़ी राहत हो सकती है, जो निवेशकों को टैक्स के बोझ से बचाने के साथ-साथ बचत की प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे सकता है।