Haryana News: हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत 3 फरवरी से निजी अस्पतालों में इलाज नहीं किया जाएगा। यह निर्णय तब लिया गया, जब निजी अस्पतालों ने सरकार से लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया। अस्पतालों का लगभग 500 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक लंबित है, और जब तक यह राशि नहीं दी जाती, अस्पताल आयुष्मान भारत कार्ड के तहत इलाज नहीं करेंगे।
इसके साथ ही, हरियाणा के पीडब्ल्यूडी (भवन एवं सड़कें) ठेकेदारों ने भी 31 जनवरी तक सरकार को भुगतान करने का समय दिया है, और इसके बाद उन्होंने काम बंद करने की धमकी दी है। ठेकेदारों का भी 500 करोड़ रुपये का लंबित भुगतान है। यह समस्या तब उठी, जब ठेकेदारों ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की और अपनी लंबित राशि का तुरंत भुगतान करने की मांग की।
यह स्थिति स्वास्थ्य और निर्माण दोनों ही क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, और अगर इन मुद्दों का समाधान नहीं होता, तो नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना के लाभों से वंचित रहना पड़ सकता है।
हरियाणा में चल रही यह स्थिति राज्य की स्वास्थ्य सेवा और निर्माण क्षेत्र दोनों के लिए गंभीर प्रभाव डाल सकती है। यहाँ दो प्रमुख मुद्दे हैं जो नागरिकों और संबंधित विभागों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं:
आयुष्मान भारत योजना से इलाज की रोक:
निजी अस्पतालों द्वारा 3 फरवरी से आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज बंद करने की घोषणा का मतलब है कि उन मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा, जो इस योजना के तहत इलाज करवा रहे थे। आयुष्मान भारत योजना एक महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य योजना है, जो गरीब और जरूरतमंद लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा प्रदान करती है।
अस्पतालों को लंबित भुगतान के चलते यह स्थिति पैदा हुई है, और जब तक सरकार इन बकाए राशियों का भुगतान नहीं करती, तब तक इलाज में कोई सुधार नहीं होगा। यह राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
पीडब्ल्यूड ठेकेदारों का भुगतान मुद्दा:
हरियाणा के पीडब्ल्यूडी ठेकेदारों ने सरकार को 31 जनवरी तक का समय दिया है, जिसके बाद वे अपने काम को बंद करने की धमकी दे रहे हैं। यदि भुगतान का मामला जल्दी सुलझता नहीं है, तो निर्माण कार्य में भी रुकावट आ सकती है, जिससे महत्वपूर्ण परियोजनाओं और सड़क निर्माण कार्यों पर असर पड़ेगा। यह राज्य के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को भी प्रभावित कर सकता है।इन ठेकेदारों का 500 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, जिसे जल्द ही निपटाने की मांग की जा रही है।